Saturday, May 3, 2025

Naz-e- Zakham

Yeh kya koi baat hai, 
kis baat ki shohrat hai,
 ki tumne kya bahut kuch dekha bahut kuch saha....
Kush naseeb samjoge apne aap ko,
Jab duniya janoge aur pata lagega ,
Kaha kaha par kya kya logo ne saha....
Itna mat itrao apni nakamyabiyon aur Zakhmo pe,
Tumhe kya khaber is duniya me logo ne kya kya dekha aur kya kya saha...

For, Jews in Germany, Palestinians in Gaza, Syrians, 1947 Partion of India, Africans and Humanity all around. 

Tuesday, December 24, 2024

खुद पे गुरूर

 यह तो तेरी किस्मत की तुझसे दिल लगा गया,
वरना हम तो वो गुरूर रखते है कि, खुद को ही खुदा से न मांगे।

Saturday, February 3, 2024

अच्छी कट रही

मैने कुछ जायदा तो नही,
बस एक ख्वाब मांगा था।
मैने कुछ जायदा तो नही मांगा था
बस एक वादा मांगा था।
तुम सीतमगार हो यह तो पता था 
पर संगदिल कंजूस भी हो यह न मांगा था।

हर बात में माना करती थी 
समझता था तुम्हारी अदा है।
में तुम्हे मनाता था की मेरा शौक रहा।
तुम रूठ ही रहती थी यह तुम्हारा जॉक रहा।

आज जो मिली महफिल में
देख लगा अच्छा हुआ न मिली
जो तुम्हारी कट रही,
जैसी भी कटे जिससे भी कटे हमारी बाला से,
हमारी तो कट रही, हसीन भी, खुशगावा भी, और जैसी भी सोंचि थी उससे भी दिलकुश भी।

Thursday, January 18, 2024

एक रात जिसकी सुबह न हो।

बेरुखी मुहब्बत

सितम हुआ हम तेरी बेरुखी को रूठना और दिल्लगी को मुहब्बत समझे, और तरह गए।

और जुल्म हुआ तू मेरी रूट को बेरुखी और मुहब्बत को दिल्लगी समझ के गुजर गई।

Wednesday, January 17, 2024

लम्हा रूक जा

वो एक पल 
जिसमे महसूस हुआ की, 
बस अब यह लम्हा 
यही इसी तरह रूक जाए।
कही से कोई आवाज नहीं 
कही से कोई खालिईश नही,
बस यही
बस यन्ही रूक जाए।
लग रहा की करते रहे ईस का इंतजार 
करते रहे सालो साल
और आया है थमा हुआ है
तो क्या करे कैसे करे क्या कहे कैसे कहे,
बस यही सोच रहे सालो साल।


Patto ke Rang

 क्या तुमने कभी कुछ ऐसा याद रखा की पत्ते भी खूबसूरत होते हैं।
हरे रंग में भी बहुत सारे हरे होते है।
हल्का हरा गाड़ा हरा
नीला हरा पीला हरा
लाल हरा गुलाबी हरा
बैंगनी और कला हरा।
फूलों के रंगों को सब देखते है
और याद भी रखते हैं।
उन पत्तो को कोई तवज्जो नहीं रखता
और नही कुछ जायदा याद रखता है,
जो उन पेड़ो को और उन फूलों को
अपने खूनो पसीने से सींचते है
जिंदगी लगा देते है
और अपनी हस्ती भी।
जिस तरह हमारे वालदेन ने 
सींचा हमे अपने खुनो जिगर से।
हम तुम सब , जो भी रंग के बने जितने भी बड़े फूल फल बने,
जहा भी है, जो भी है, जितना भी है,
बस उन्ही पत्तो की तरह,
 बेनिगाह, मां बाप की से है।

खुदा से गुजारिश है हमे,
हम भी उसी का कुछ हिस्सा रहे,
अपनी औलादों को हम भी वो से सके और उन्हें भी इस गुलफाम का
फूल और फल बना सके।