Thursday, January 18, 2024
बेरुखी मुहब्बत
सितम हुआ हम तेरी बेरुखी को रूठना और दिल्लगी को मुहब्बत समझे, और तरह गए।
और जुल्म हुआ तू मेरी रूट को बेरुखी और मुहब्बत को दिल्लगी समझ के गुजर गई।
Wednesday, January 17, 2024
लम्हा रूक जा
वो एक पल
जिसमे महसूस हुआ की,
बस अब यह लम्हा
यही इसी तरह रूक जाए।
कही से कोई आवाज नहीं
कही से कोई खालिईश नही,
बस यही
बस यन्ही रूक जाए।
लग रहा की करते रहे ईस का इंतजार
करते रहे सालो साल
और आया है थमा हुआ है
तो क्या करे कैसे करे क्या कहे कैसे कहे,
बस यही सोच रहे सालो साल।
Patto ke Rang
क्या तुमने कभी कुछ ऐसा याद रखा की पत्ते भी खूबसूरत होते हैं।
हरे रंग में भी बहुत सारे हरे होते है।
हल्का हरा गाड़ा हरा
नीला हरा पीला हरा
लाल हरा गुलाबी हरा
बैंगनी और कला हरा।
फूलों के रंगों को सब देखते है
और याद भी रखते हैं।
उन पत्तो को कोई तवज्जो नहीं रखता
और नही कुछ जायदा याद रखता है,
जो उन पेड़ो को और उन फूलों को
अपने खूनो पसीने से सींचते है
जिंदगी लगा देते है
और अपनी हस्ती भी।
जिस तरह हमारे वालदेन ने
सींचा हमे अपने खुनो जिगर से।
हम तुम सब , जो भी रंग के बने जितने भी बड़े फूल फल बने,
जहा भी है, जो भी है, जितना भी है,
बस उन्ही पत्तो की तरह,
बेनिगाह, मां बाप की से है।
खुदा से गुजारिश है हमे,
हम भी उसी का कुछ हिस्सा रहे,
अपनी औलादों को हम भी वो से सके और उन्हें भी इस गुलफाम का
फूल और फल बना सके।
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