WAQT KABHI MILA HI NAHI
ना जाने कब हम भी कहें..
Waqt कभी मिला ही नही
कर के अफसोस फिर कहे..
Waqt कभी मिला ही नहीं ...
...कुछ waqt अपने लिए जिसे सिर्फ़ अपना कहें...
... कुछ काम सिर्फ अपने लिए जिसे सिर्फ़ अपना कहें l
करे वही जो दिल कहें
सुने वही जो दिल चाहें....
बिना किसी की फिक्र किये,
बिना किसी का अफसोस किये l
करे वही जो दिल कहें सुनें वही जो दिल सुनें ,
...की waqt से पड़े कहना नहीं ..
कि waqt हमे मिला ही नहीं l
...जो खुद से कभी ईमानदार ना हुआ,
...जो अपनों से कभी बेईमान ना हुआ,
वो क्या खाक जिया वो क्या खाक जिया l
यह सोंच फिर हर बार रूका , अभी नहीं कभी फिर कहा...
...यह waqt ही है फिर कभी लौटा नहीं ...
...किसी के लिए रूका नहीं.
जो waqt पर जिया नहीं..
जिसे waqt पे waqt मिला नहीं,
वो भी क्या राख जिया ...
वो भी क्या खाक जिया l