Saturday, February 3, 2024

अच्छी कट रही

मैने कुछ जायदा तो नही,
बस एक ख्वाब मांगा था।
मैने कुछ जायदा तो नही मांगा था
बस एक वादा मांगा था।
तुम सीतमगार हो यह तो पता था 
पर संगदिल कंजूस भी हो यह न मांगा था।

हर बात में माना करती थी 
समझता था तुम्हारी अदा है।
में तुम्हे मनाता था की मेरा शौक रहा।
तुम रूठ ही रहती थी यह तुम्हारा जॉक रहा।

आज जो मिली महफिल में
देख लगा अच्छा हुआ न मिली
जो तुम्हारी कट रही,
जैसी भी कटे जिससे भी कटे हमारी बाला से,
हमारी तो कट रही, हसीन भी, खुशगावा भी, और जैसी भी सोंचि थी उससे भी दिलकुश भी।