Wednesday, May 27, 2020

अबू ज़फ़र सलाहद्दीन मुहम्मद बहादुर शह।

किस किस का नाम लिखोगे कुर्बानियो की फिरस्त मे,
बस एक जफर ही काफी है,
तुम्हारे ज़माने भर की मुनाफीक्त के लिये।

Wednesday, May 20, 2020

निज़मे मुहब्बत

कोई तेरा खुदा, किसी के लिये तू खुदा।
बस येही निज़ाम ही मुहब्बत का, 
किसी को तू ना मिले कोई तुझे ना मिले।