Thursday, October 26, 2023

Aftab ho tum..

 तुम्हें यूं हीं नही मैं आफताब कहा करता हु।
तुम दूर भी 
तुम नूर भी
तुम चमक भी
तुम धमक भी
तुम आस भी
तुम सांस भी
तुम नरम भी 
तुम गरम भी

तुम हाई जो जिंदगी को सांसे देती 
तुम ही हो जो मेरे मेहताब को रोशन करती l
तुम हो तो सब है
सब है तभी तुम हो।

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