Wednesday, September 9, 2020

उम्मीद और खवाब

जो अधुरे खवाब हैं, वोही तो तेरे साथ है।
जो मुकम्मल हुए , वो तो पराये हुए,
हर खवाब की तमीर, तेरे जिन्दगी की लौ हैं 
नही तो इतना जिन्दगी-ए-ज़ौक कहा,   हर्रोज़ जधोजहद लडे है।

इश्तिराहत से पहले उमीदें खवाब, हर सुभ उन्ही खवाबों की तत्बीरे।

सुभ फिर वोही जोश की आज तो येह कर ही गुजरेंगे, 
फीर वो नाऊमीदी की इस जिन्दगी मे रखा क्या है , 
इस जिन्दगी मे करा क्या हैं।

जिन्दगी की सुभ - शाम और खवाब- नाऊमीदी 
रोज़ खवाबों की तामीर- तत्बिरे ही तो जिन्दा रखेगी,
इस नाऊमीदी से ना हार एक येही ही हैं जिस से हर खवाब है और हर उमीद हैं।

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