Friday, June 5, 2020

दिन जो रात हुए

अब येह कैसा दिन जो रात से बत्तर हैं 
चमगादरड़ रात का इन्तज़ार नही करते,
कुत्ते भी दिन मे रो रहे हैं,
गिदओदे की अवाज ऐसे दिन साफ सनयाए देती है 
प्रेत की कोई ज़रुरत नही जगह नही इन्सान खुद प्रेतॉ का प्रेत हो रहा है।

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