लगी रहे आग दिल मे एक , कम से कम एक रिश्ता तो बना रहता है।
मुहब्बत न सही खलीज ही सही, एक बहाना बना रेहता तुम्हे याद रखने का।
मांन के मौसम खराब क्यों अल्लाह से रुसवाई है।
रुट कर बैठे हो और नज़रे बद आई है।
No comments:
Post a Comment